(समाचार "News") अब बढ़ाने होंगे सीटीईटी क्वालिफाइड शिक्षक


अब बढ़ाने होंगे सीटीईटी क्वालिफाइड शिक्षक


सेंट्रल टीचर एलिजबिलिटी टेस्ट (सीटीईटी) में सफलता प्राप्त करने के मामले में अभी शहर के शिक्षकों का अनुपात काफी कम है। साल में दो बार होने वाली इस परीक्षा में बहुत से स्कूलों से तो एक भी शिक्षक शामिल नहीं हो रहे हैं।

जिन स्कूलों में सरकारी फंड मिलता है वहां तो शिक्षकों के लिए सीटीईटी क्वालिफाइड होना जरूरी कर दिया गया है। फिलहाल यह प्राइवेट स्कूलांें में अनिवार्य नहीं है, लेकिन अगले कुछ सालों में बोर्ड इन स्कूलों में भी इसे अनिवार्य कर सकता है। इसके बाद सीबीएसई के किसी भी स्कूल में शिक्षक की नौकरी पाने के लिए सीटीईटी सर्टिफिकेट होना जरूरी हो जाएगा।

20 फीसदी शिक्षक ही क्वालिफाइड

शहर के बड़े स्कूल तो अपने शिक्षकों को सीटीईटी में शामिल करवा रहे हैं, लेकिन छोटे स्तर पर संचालित होने वाले स्कूलों का इस ओर ध्यान नहीं। सहोदय ग्रुप के ज्वॉइंट सेक्रेटरी मनोज बाजपेयी कहते हैं 'शहर के लगभग 15 से 20 प्रतिशत शिक्षक तो इस टेस्ट में सफलता प्राप्त कर चुके हैं। मगर इस बार स्कूलों में परीक्षाओं के दौरान ही सीटीईटी भी आयोजित करवा दी गई। इसलिए कई स्कूलों के शिक्षक परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।

सफल नहीं हो पाते शिक्षक

अब तक का परिणाम बताता है कि सीटीईटी में शिक्षकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी पिछले साल इस टेस्ट में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए थे, लेकिन उनमें से पास लगभग दो फीसदी ही हो पाए थे। इसके बाद इस साल सीबीएसई ने बदले पैटर्न पर सीटीईटी आयोजित करवाई। इस बार पहले पर्चे में 2 लाख 6 हजार शिक्षक शामिल हुए थे। मगर इनमें से 24 हजार 629 शिक्षक ही सफल रहे। इसी तरह दूसरे पर्चे में 4 लाख 59 हजार शिक्षक शामिल हुए, लेकिन इसमें भी 12 हजार 843 शिक्षक ही सफल हो पाए। दरअसल, इस टेस्ट के जरिए सीबीएसई शिक्षकों की गुणवत्ता और टीचिंग क्षमता बढ़ाना चाहता है।

60 प्रतिशत लाना जरूरी

सीटीईटी में उसी शिक्षक को सफल माना जाता है जो परीक्षा में 60 या इससे ज्यादा प्रतिशत लाता है। इस हिसाब से बड़ी संख्या में शिक्षक उत्तीर्ण तो हो जाते हैं, लेकिन 60 प्रतिशत अंक प्राप्त न करने के कारण उन्हें बोर्ड क्वालिफाइड नहीं मानता। इस साल तो फिर भी शिक्षकों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन पिछले साल तो स्थिति इससे भी खराब थी। सीटीईटी में एक बार सफलता प्राप्त करने के बाद सर्टिफिकेट 7 सालों तक मान्य रहता है। इसके बाद दोबारा एग्जाम देना होती है।

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Courtesy: Nai Duniya